TET अनिवार्यता के विरुद्ध चल रहे आंदोलन का असर
जल्द मिलेगी NON TET शिक्षकों को राहत,
राज्यसभा में प्राइवेट बिल प्रस्तुत
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आरटीई एक्ट २००९ (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) का संशोधन बिल २०२६ (Bill No. XXVII of 2026)
भारत सरकार का राजपत्र (The Gazette of India Extraordinary) का हिस्सा है। यह Right of Children to Free and Compulsory Education (Amendment) Bill, 2026 है, जो Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009(संक्षेप में RTE Act या RTE अधिनियम) में संशोधन करता है।
१. बिल का नाम, उद्देश्य और लागू होने का समय
- संक्षिप्त नाम: The Right of Children to Free and Compulsory Education (Amendment) Act, 2026।
- कब लागू होगा: यह अधिनियम तुरंत (at once) लागू हो जाएगा।
- मुख्य उद्देश्य: शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता (minimum qualifications) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ०१.०९.२०२५ के फैसले (Anjuman Shaht-e-Taleem Trust vs State of Maharashtra & Others) के बाद पैदा हुई समस्या को हल करना। बिल का लक्ष्य है:
- शिक्षकों की गुणवत्ता बढ़ाना,
- लेकिन पुराने शिक्षकों (pre-existing teachers) के सेवा अधिकार, पदोन्नति, वेतन, पेंशन आदि को पूरी तरह सुरक्षित रखना,
- TET (Teacher Eligibility Test) या अन्य अतिरिक्त योग्यताओं को केवल भविष्य में नियुक्त होने वाले शिक्षकों पर लागू करना (prospective effect)।
२. बिल के मुख्य संशोधन (Key Amendments)
(क) धारा २३ में संशोधन (Amendment of Section 23)
RTE Act की धारा २३ शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करती है। इस बिल में निम्नलिखित बदलाव किए गए हैं:
1. धारा २३(१) में “minimum qualifications” के बाद यह शब्द जोड़े गए:
“subject to the provisions of sub-sections (4), (5) and (6)”
→ मतलब: नई योग्यताएँ पुराने शिक्षकों पर लागू नहीं होंगी।
2. धारा २३(२) का दूसरा proviso पूरी तरह हटा दिया गया।
3. धारा २३(३) के बाद नई उप-धाराएँ जोड़ी गईं:
- उप-धारा (४): जो शिक्षक इस बिल से पहले नियुक्त किए गए थे, उन्हें अब TET या कोई अतिरिक्त योग्यता हासिल करने की जरूरत नहीं है। उनकी सेवा, पदोन्नति, वरिष्ठता आदि बनी रहेगी।
- उप-धारा (५): TET या कोई अन्य परीक्षा/योग्यता केवल इस बिल के लागू होने के बाद या सरकार द्वारा नोटिफाई किए गए तारीख के बाद की नियुक्तियों पर लागू होगी।
- उप-धारा (६): पुराने शिक्षकों को TET न पास करने या अतिरिक्त योग्यता न हासिल करने के आधार पर नौकरी से निकालना, पदोन्नति रोकना या कोई सजा देना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
- उप-धारा (७): सरकार को पुराने शिक्षकों के लिए प्रोफेशनल अपग्रेडेशन, ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग के दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार। लेकिन इन ट्रेनिंग को सेवा सुरक्षा या पदोन्नति से नहीं जोड़ा जाएगा (no linkage with service security or promotion)।
(ख) नई धारा २३A का समावेश (Insertion of new Section 23A)
“Protection of service conditions of pre-existing teachers”
- इस नई धारा में साफ लिखा है:
- पुराने शिक्षकों की सेवा शर्तें, पदोन्नति के रास्ते, पेंशन, रिटायरमेंट बेनिफिट्स आदि किसी भी नए योग्यता नियम के कारण बिगाड़े नहीं जा सकते।
- नई योग्यताएँ केवल भविष्य की नियुक्तियों पर लागू होंगी (prospective)।
- इस धारा के प्रावधान किसी भी अन्य कानून से ऊपर हैं (overriding effect)।
(ग) धारा ३८ में संशोधन (Amendment of Section 38)
- धारा ३८(२) में नया खंड (१d) जोड़ा गया:
- सरकार को पुराने शिक्षकों के लिए प्रोफेशनल अपग्रेडेशन और ट्रेनिंग के दिशा-निर्देश बनाने का अधिकार।
(घ) नई धारा ३९A का समावेश (Insertion of new Section 39A)
- “Power to issue protective directions”
- सरकार को यह अधिकार कि वह पुराने शिक्षकों को किसी भी प्रकार की सेवा संबंधी सजा, क्लैरिफिकेशन या गाइडलाइन से बचाने के लिए सुरक्षात्मक दिशा-निर्देश जारी कर सके।
३. बिल का “Statement of Objects and Reasons” (उद्देश्य और कारणों का विवरण)
- RTE Act २००९ में धारा २३ पहले से ही न्यूनतम योग्यता तय करती थी, जिसके आधार पर TET शुरू हुआ।
- सुप्रीम कोर्ट के ०१.०९.२०२५ के फैसले ने TET को **पुराने शिक्षकों पर भी रेट्रोस्पेक्टिव** (पिछले प्रभाव) से लागू कर दिया।
- इससे ग्रामीण, दूरदराज और पिछड़े इलाकों के हजारों शिक्षकों में भारी असंतोष फैल गया क्योंकि:
- वे दशकों से सेवा दे रहे थे,
- TET न पास करने पर नौकरी, पदोन्नति या रिटायरमेंट प्रभावित हो सकता था।
- बिल का उद्देश्य:
- शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना,
- लेकिन प्राकृतिक न्याय, सेवा सुरक्षा और संवैधानिक निष्पक्षता को भी ध्यान में रखना,
- TET को केवल आगे से लागू करना,
- पुराने शिक्षकों को पूर्ण सुरक्षा देना।
४. बिल का कुल प्रभाव (Overall Impact)
- नए शिक्षक : TET + अन्य योग्यताएँ अनिवार्य होंगी।
- पुराने शिक्षक (इस बिल से पहले नियुक्त): TET या नई योग्यता की कोई बाध्यता नहीं। उनकी नौकरी, वेतन, पदोन्नति, पेंशन पूरी तरह सुरक्षित।
- सरकार को पुराने शिक्षकों की ट्रेनिंग का अधिकार, लेकिन ट्रेनिंग को सजा या पदोन्नति रोकने का हथियार नहीं बनाया जा सकता।
- बिल का मकसद शिक्षा सुधार और शिक्षकों के अधिकार दोनों को संतुलित करना है।
यह बिल संसद में पेश होने के बाद कानून बनने के बाद ही लागू होगा ।
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राजेन्द्र सिंह राठौर
प्रदेश अध्यक्ष यूटा उत्तर प्रदेश@
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